भर्खरै हिन्दी चलचित्र “सञ्जु” हेरें । फिल्मी नायक सञ्जय दत्तको जीवनीमा आधारित सो फिल्म निकै राम्रो लाग्यो । विवादको भुमरीमा फँसेका सञ्जय दत्तको जीवन कथा निकै रोचक र मार्मिक रहेछ सोको फिल्माङ्कन पनि स्तरीय । सञ्जय दत्तलाई विवादको घेराबाट बाहिर ल्याउन यो फिल्म सक्षम छ । फिल्म हेर्दाको करिब तीन घण्टाको समय एकै छिनमा बिते जस्तो लाग्यो । उनका जीवनको उतारचढावसँगै दुःख र हर्षका भावना मनमा घुमिरहे । अन्त भने सुखद रहेछ ।
हरेक युवाको सफलता र असफलतामा उसका अभिभावक र साथीको महत्वपूर्ण भूमिका हुन्छ । अभिभावकसँग हार्दिक र आत्मीय सम्बन्ध भएमा त्यसले जीवनलाई निकै ठुलो सकारात्मक उर्जा दिनसक्छ । जीवनको कतिपय क्षण र मोडमा भने अभिभावकभन्दा साथी महत्वपूर्ण हुँदा रहेछन् । सञ्जु यसैको उदाहरण हो ।
यस फिल्मा गाइएका र सम्झिएका केही गीतहरु भने निराशा, ग्लानि, हतोत्साह, असफलताका ओखती हुन भन्ने मेरो ठम्याइछ । त्यसैले ती गीतका शब्द पछि सम्झनका लागि यहाँ प्रस्तुत गरेको छु । तपाईंहरुले पनि यसबाट लाभ उठाउनुहोला भन्ने आशा लिएको छु ।
१. पिघला दे जंजीरें
पिघला दे जंजीरें
बना उनकी शमशीरें
कर हर मैदान फ़तेह ओ बंदेया.
कर हर मैदान फ़तेह
घायल परिंदा है तू
दिखला दे जिंदा है तू
बाक़ी है तुझमें हौसला
तेरे जूनून के आगे
अम्बर पनाहे मांगे
कर डाले तू जो फैसला
रूठी तकदीरें तो क्या
टूटी शमशीरें तो क्या
टूटी शमशीरें से ही हो…
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह, रे बंदेया… हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह, रे बंदेया… हर मैदान फ़तेह
इन गर्दिशों के बादलों पे चढ़ के
वक़्त का गिरबान पकड़ के
पूछना है जीत का पता जीत का पता.
इन मुठियों में चाँद तारे भर के
आसमां की हद से गुज़र के
हो जा तू भीड़ से जुदा भीड़ से जुदा भीड़ से जुदा
कहने को ज़र्रा है तू
लोहा का छर्रा है तू
टूटी शमशीरों से हो, हो…
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह, रे बंदेया…
हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह कर हर मैदान फ़तेह, ओ बंदेया…
हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह, रे बंदेया… हर मैदान फ़तेह…
तेरी कोशिशें ही कामयाब होंगी
जब तेरी ये जिद्द आग होगी
फूँक दे नाउम्मदियाँ, नाउम्मदियाँ
तेरे पीछे पीछे रास्ते ये
चल के बाहों के निशानों में
ढल के ढूँढ लेंगे
अपना आशियाँ अपना आशियाँ,
अपना आशियाँ.
लम्हों से आँख मिला के
रख दे जी जान लड़ा के
टूटी शमशीरों से ही हो.
कर हर मैदान हर मैदान हर मैदान. हर मैदान.
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह कर हर मैदान फ़तेह, ओ बंदेया…
हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह, ओ बंदेया… हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह, रे बंदेया… हर मैदान फ़तेह
कर हर मैदान फ़तेह, रे बंदेया… हर मैदान फ़तेह.
२. मेहरबानो कदरदानो दोस्तो यारो
मेहरबानो कदरदानो दोस्तो यारो
अरे खेल देखो खेल ओने तवो तहरे उप
दुनिया मे रहना है तो काम करो प्यारे
हाथ जोड़ सबको सलाम करो प्यारे
वरना ये दुनिया जीने नही देगी
खाने नही देगी पीने नही देगी
खेल कोई नया सुबह-शाम करो प्यारे
दुनिया मे रहना…
पैसे बिना दुनिया मे रोटी नही मिलाती
रोटी नही मिलाती लंगोटी नही मिलाती
हाथ जोड़ सबको सलाम करो प्यारे
दुनिया मे रहना…
एक दिन तेरे-मेरे कवाब होगे पूरे
ऐसी कोई बात कर चल ओ जमूरे
रह जाए सब दिल थाम कर ओ प्यारे
दुनिया मे रहना…
टांगे मे लगी जैसी घोड़ी चली जाए
रस्सी पे गोरी ऐसी दौड़ी चली जाए
चल घर चले राम-राम करो प्यारे
दुनिया मे रहना…
३. रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
काँटों पे चलके मिलेंगे साए बहार के
रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
काँटों पे चलके मिलेंगे साए बहार के
ओ राही.. ओ राही..
ओ राही.. ओ राही..
सूरज देख रुक गया है
तेरे आगे झुक गया है
सूरज देख रुक गया है
तेरे आगे झुक गया है
जब कभी ऐसे कोई मस्ताना
निकले है अपनी धुन में दीवाना
शाम सुहानी बन जाते हैं दिन इंतजार के
ओ राही.. ओ राही..
रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
काँटों पे चलके मिलेंगे साए बहार के
ओ राही.. ओ राही..
ओ राही.. ओ राही..
साथी ना कारवां है
ये तेरा इम्तेहां है
साथी ना कारवां है
ये तेरा इम्तेहां है
यूँ ही चला चल दिल के सहारे
करती है मंजिल तुमको इशारे
देख कहीं कोई रोक नहीं ले तुझको पुकार के
ओ राही.. ओ राही..
रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
काँटों पे चलके मिलेंगे साए बहार के
ओ राही.. ओ राही..
ओ राही.. ओ राही..
नैन आंसू जो लिए हैं
ये राहों के दिए हैं
नैन आंसू जो लिए हैं
ये राहों के दिए हैं
लोगों को उनका सब कुछ दे के
तू तो चला था सपने ही ले के
कोई नहीं तो तेरे अपने हैं सपने ये प्यार के
ओ राही.. ओ राही..
रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
काँटों पे चलके मिलेंगे साए बहार के
ओ राही.. ओ राही..
ओ राही.. ओ राही..
४. कुछ तो लोग कहेंगे, लोगाने का काम है कहना
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगाने का काम है कहना
छोडो, बेकार की बातो मे , कही बीत ना जाए रैना
कुछ रीत जगत की एसी है
हर एक सुबह की शाम हुयी
तू कौन है, तेरा नाम है क्या
सीता भी यहा बदनाम हुयी
फिर क्यो संसार की बातो से
भीग गए तेरे नैना
हम को जो ताने देते है
हम खोये है इन रंग रलियो मे
हम ने उन को भी छुप छुप के
आते देखा इन गलियो मे
ये सच है जूठी बात नही
तुम बोलो ये सच है ना
५. तेरे जैसा यार कहाँतेरे जैसा यार कहाँ
कहा ऐसा याराना
याद करेगी दुनियां
तेरा मेरा अफसाना] x 2
[मेरी ज़िन्दगी सवारी
मुझको गले लगाके
बैठा दिया फलक पे
मुझे खात से उठाके] x 2
यारा तेरी यारी को
मैने तो खुदा मन
याद करेगी दुनियां
तेरा मेरा अफसाना
[मेरे दिल की यह दुआ है
कभी दूर तू न जाए
तेरे बिना हो जीना
वो दिन कभी न आये] x 2
तेरे संग जीना यहाँ
तेरे संग मर जाना
याद करेगी दुनियां
तेरा मेरा अफसाना
तेरे जैसा यार कहाँ
कहा ऐसा याराना
याद करेगी दुनियां
तेरा मेरा अफसाना
